कबीर दास के दोहे हिन्दी में | Kabir Das ke Dohe in Hindi with meaning

Advertise with IZEA Media

Kabir Das ke Dohe in Hindi with meaning

कुटिल वचन सबतें बुरा, जारि करै सब छार।Kabir das ke dohe in hindi
साधु वचन जल रूप है, बरसै अमृत धार।।

अर्थ: संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि कटु वचन बहुत बुरे होते हैं और उनकी वजह से पूरा बदन जलने लगता है। जबकि मधुर वचन शीतल जल की तरह हैं और जब बोले जाते हैं तो ऐसा लगता है कि अमृत बरस रहा है।


शब्द न करैं मुलाहिजा, शब्द फिरै चहुं धार।
आपा पर जब चींहिया, तब गुरु सिष व्यवहार।।

अर्थ: संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि शब्द किसी का मूंह नहीं ताकता। वह तो चारों ओर निर्विघ्न विचरण करता है। जब शब्द ज्ञान से अपने पराये का ज्ञान होता है तब गुरु शिष्य का संबंध स्वतः स्थापित हो जाता है।


कबीर गर्व न कीजिए, ऊंचा देखि आवास
काल परौं भूईं लेटना, ऊपर जमसी घास।।

अर्थ: अपना शानदार मकान और शानशौकत देख कर अपने मन में अभिमान मत पालो जब देह से आत्मा निकल जाती हैं तो देह जमीन पर रख दी जाती है और ऊपर से घास रख दी जाती है।


गाहक मिलै तो कुछ कहूं, न तर झगड़ा होय।
अन्धों आगे रोइये अपना दीदा खोय।।

अर्थ: कोई ऐसा व्यक्ति मिले जो अपनी बात समझता हो तो उससे कुछ कहें पर जो बुद्धि से अंधे हैं उनके आगे कुछ कहना बेकार अपने शब्द व्यर्थ करना है।


Read More Kabir Das ke Dohe in Hindi: 

Page 1  Page 2  Page 3  Page 4  Page 5

This entry was posted in Kabir Das Ke Dohe and tagged , . Bookmark the permalink.

Leave a Reply